Jump to ratings and reviews
Rate this book

हनुमान बाहुक : अर्थ सहित संपूर्ण पाठ विधि

Rate this book
एक समय श्री गोस्वामी तुलसीदास जी के शरीर कुरोग उत्पन्न हुआ और उन्हे असहनीय पीड़ा हुई। तुलसीदास जी ने बहुत उपचार किये, परन्तु पीड़ा मिटाने में वे सफल न हुए। रोग कालकृत हे, कलिकृत है, देवकृत है भूतप्रेतादिकृत है, खलकृत है पता नहीं चल पा रहा था। अत: उन्होंने श्री हनुमान जी से रोग-निवृत्ती के लिये प्रार्थना की। सारा कुरोग श्री हनुमान जी कि कृपा से नष्ट हो गया। रोग से मुक्त हो जाने पर श्री तुलसीदास जी ने अपनी की हुई प्रार्थना को रचा और हनुमान बाहुक नाम रखा।
जिस हनुमान बाहुक पाठ से समस्त बाधाओ से मुक्ति मिलती है, वही हनुमान बाहुक यहां पुरातन तरीके से पद्य, हिन्दी अर्थ एवं टिप्पडी सहित दिया गया है।
हनुमान बाहुक के प्रत्येक पद्य का विशेष प्रभाव है।

कार्य सिद्धि के लिए संपुट पाठ मंत&

194 pages, Kindle Edition

Published December 6, 2023

1 person is currently reading

About the author

Hath Yogi Akhilesh

3 books1 follower

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
1 (100%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
Displaying 1 of 1 review
Displaying 1 of 1 review

Can't find what you're looking for?

Get help and learn more about the design.