अपने नए और 36 वें उपन्यास “अपहरण” के माध्यम से मैं फिर पाठकों की अदालत में हाजिर हूँ।
जैसा कि इस उपन्यास के नाम से ही जाहिर है, इसकी कहानी शुरू होती है एक परिवार के तीन लोगों के अपहरण के साथ। अपहरणकर्ता इतना चालाक है कि वो अपने पीछे कोई भी सबूत नहीं छोड़ता और पुलिस के पास आगे बढ़ने के सभी दरवाजे अपहरणस्थल पर ही बंद हो जाते हैं।
अपराधी की ये चाल तो हर किसी की समझ से परे होती है कि अपहरण के काफी दिन बीत जाने के बाद भी अपहरणकर्ता बंधकों की रिहाई के बदले में ना तो किसी फिरौती की मांग करता है और ना ही उसकी अन्य कोई मांग सामने आती है।
महिमा कपूर नाम की लड़की तो अपनी खुशकिस्मती से अपहरणकर्ताओं के चंगुल में आने से बच जाती है, मगर उसके पिता डॉक्टर लोकेश कपूर, माँ फाल्गुनी कपूर और मौसा मनोहर भसीन का &