उम्मीद प्रेम का अन्न है’ एक कविता-संग्रह है। लेखन यात्रा में नींव के पत्थर सरीखा। यह लेखक जगह नहीं घेरता, अपनी नन्हीं कविताएँ साझा कर, एक स्पेस क्रिएट करता है, जहाँ पाठकों की सोच विस्तार पा सके। लेखक अपनी रचनाओं के ज़रिए अपने जीवन के सबसे छुपे हुए बिंबों को उघाड़ता है। एक रहस्य का, मंद गति से खुलना। जीवन-छाया में बिंधी स्मृतियों को तराशने जैसा। सबसे सुंदर बात, अनुराग वत्स की कविताओं को आप विजुवलाईज़ कर सकते हैं, साफ़-सुथरे शब्द एक इमेज़री बनाते चलते हैं, चेहरों या जगहों की नहीं, भावों की - जेस्चर्स की।
साल 2024 में पढ़ी गई यह मेरी पहली किताब है। जनवरी-फरवरी यह बिस्तर के सिरहाने रही। शिकायत इतनी-भर, ग़र थोड़ा और पढ़ने को मिलता..!
किताब बुकशेल्फ़ में जाने से पहले कुछ कविताएँ दोबारा पढ़ी, साझा कर रही हूँ।
तुम बहुत देर से आईं मेरी पंक्ति में
जैसे बहुतेरे शब्दों के बाद आता है
दुबला-लजीला पूर्ण-विराम
पिछले बाक़ी का अर्थ-भार सम्भालता
प्रेम के पन्ने पर सबसे अन्तिम अंकन।
तुम्हारी आँखों से एक दिन
झर जाऊँगा
जैसे आसमान से रजत बूँदें
वृक्ष से फूल।
कितनी ही सरल क्यों न हो
हमारी ज़िन्दगी एक सीधी रेखा नहीं होती
उसे खींचने में ईश्वर के हाथ की काँप
क़ायम रहती है।