शेरशाह फावड़ा लेकर सैनिकों के साथ काम कर सकता था तो उसी शहर मैं एक ऐसा करोड़पति व्यापारी भी था जो पीठ पर समान उठाए बैल लादने और अपने आदमियों के साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। उसका लड़का भी उसके आदर्शों पर चलता हुआ एक धार्मिक हिन्दू था....
एक के बाद एक उसने 22 लड़ाइयों मैं मुगलों से लेकर बंगाल के सुल्तान तक सभी को अपने 'हवाई' हाथी से रौंद दिया था।
और आगे चलकर विक्रमादित्य(राजाधिराज) बना। हिन्दू उसे विक्रमादित्य हेमू कहते थे, वही अफगान उसे हेमू शाह के नाम से पुकारते थे।
हेमू के पिता पुरनदास था, वो हर काम करने के लिए हमेशा तयार रहता था और किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं मानता था। उसने अपने दोनों लड़कों को ब्राह्मणों के शास्त्र और क्षत्रियों के शस्त्र सिखाये। पूरनदास के लड़के और प्ë