पुस्तक - बिराज बहु
लेखक - शरदचंद्र चटोपाध्याय
प्रकाशन वर्ष - १९१४ (बंगला)
उपन्यास का कथा स्थान है हुबली जिले का सप्तग्राम जहां निवास करते हैं दो भाई नीलांबर और पीतांबर ।
नीलांबर असाधारण व्यक्तित्व का धनी हैं वह मुर्दा जलाने, कीर्तन करने और ढोल बजाने में बेजोड़ था अपने गांव में वह परोपकार के लिए प्रसिद्ध और गंवारपन के लिए बदनाम था। छोटा भाई पीतांबर को दुनियादारी से ज्यादा मतलब नहीं, और बेहद गुस्सैल प्रकृति का व्यक्ति था। वह अदालत जाता अर्जियां लिखता और जो कुछ कमाता घर आकर संदूक में बंद कर देता।
शरदचंद्र की उपन्यास 'बिराज बहु' की नायिका और मुख्य भूमिका ब्रजरानी की हैं
जिनकी शादी ९ वर्ष के अवस्था में नीलांबर से हो जाती हैं दंपति की कोई संतान नहीं हैं जो कुछ हैं इनकी छोटी बहन हरिमती (पुंटी)है जिसे नीलांबर की मां तीन वर्ष की अवस्था में सात वर्ष पूर्व छोड़ कर स्वर्ग सिधार गई थी।
बहन हरिमती के विवाह के पश्चात ब्रजरानी और नीलांबर के साधारण दांपत्य जीवन में असाधारण परिवर्तन हो जाता हैं जो कथा को भावुकता से आगे बढ़ाती हैं
नीलांबर के घर गृहस्थी का सारा दारोमदार बिराज बहु पर था। बिराज बहु ने घर की जिम्मेदारी दस वर्ष की अवस्था में ही संभाल ली थी आज उसकी उम्र उन्नीस वर्ष है ।
कई बार बिराज बहु के मुख से असंतोषजनक और हृदयभेदक शब्द का निकल जाना और नीलांबर का दुःखी हो कर उसके तरफ से मुंह मोड़ लेना उपन्यास को नीरव दुःख और उदासी की तरफ मोड़ देता हैं।
ब्रजरानी और नीलांबर का प्रेम संपूर्ण उपन्यास में अलग- अलग रूप (विश्वास, त्याग, मोह इत्यादि)में दिखाई देते हैं।
दुःखो के पलड़े में घिरे बिराज बहु को सखी के रूप में मोहिनी (छोटी बहु)(देवर���नी) मिली। दोनों सगी बहनो के तरह सुख - दुख साझा करती हैं।
उपन्यास जैसे - जैसे आगे बढ़ेगा यह अबूझ मोड़ो पर पहुंचते हुए आपके हृदय के मर्म को स्पर्श कर जाएगा।
शरदचंद्र जी की भाषा सरस,सरल और प्रवाहपूर्ण हैं उपन्यास में कही (पात्रों और कहानी)भी जटिलता ना लाने का प्रयास किया गया हैं। बंगाली समाज को केंद्र में रख कर लिखी गई यह उपन्यास पुरुषों और स्त्रियों के प्रत्येक चरित्रों को वास्तविकता से दर्शाया हैं।
उपन्यास लिखते समय बंगाल के छोटे गांव में जो भी जातीय या सामाजिक परिवेश रहा होगा उसका चित्रण बखूबी किया गया हैं।
हम सबने अपने जीवन में कई रिश्तों को कच्चे या पक्के तौर पर निभाया या जिया होगा यह उपन्यास हमें रिश्तों के मजबूती- कमजोरी, प्रेम, सहानुभूति,कुंठा और निराशा का सही अर्थ बतलाता हैं।