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Sunil #121

सिंगला मर्डर केस

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हिमेश सिंगला के व्यक्तित्व में ऐसा कुछ नहीं था जो औरतों को आकर्षित कर पाता. वो उम्र में कोई पचास साल का मामूली शक्ल सूरत
वाला आदमी था जो अपने गंजे सिर पर विग लगाता था. फिर भी उस शख्स का किरदार कैसानोवा जैसा था, वो औरतों का रसिया था. और अपनी लम्पट प्रवृत्ति को छुपाता भी नहीं था.
फिर एक रात वो अपने घर के ड्राइंगरूम में माथे पर गोली खाकर मरा पड़ा पाया गया.
सुनील सीरीज का नवीनतम, वृहद् उपन्यास
सुरेन्द्र मोहन पाठक की चमत्कारी कलम की एक और पेशकश.

320 pages, Paperback

First published March 30, 2014

8 people are currently reading
107 people want to read

About the author

Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.

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Community Reviews

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17 (38%)
4 stars
19 (43%)
3 stars
4 (9%)
2 stars
2 (4%)
1 star
2 (4%)
Displaying 1 - 10 of 10 reviews
Profile Image for Vishi Sinha.
Author 2 books20 followers
June 16, 2014
As always. the Lekhakiya itself worth the price of the novel. So the novel, in fact is a bonus. This time, Lekhakiya has autobiographical touch, covering the days the author spent in Lahore before partition and the degrading value of currency in the light of rising prices.
A typical whodunnit novel full of suspense. there are too many suspects and each of which has some clear motive behind the murder. And the chemistry between Sunil and Ramakant is as usual, awesome. A good read indeed.
And there is also a short story included in the hard-copy version (not included there in the e-book version), which can not be rated below the Novel itself. So its a double treat for the readers.
Profile Image for Amit Tyagi.
1 review5 followers
April 7, 2014
सिंगला मर्डर केस चांदी की प्लेट है जिसका लेखकीय सोने की गिलोरी है और शोर्ट स्टोरी उसमें हीरे की लौंग है |
Profile Image for Makarand Acharya.
1 review1 follower
June 16, 2014


Singla Murder case is well balanced, neatly written murder mystry. Every spice is in perfect balance in this novel. Sunil is once again at his best so is SMP Sir.

Once you start and the pace of the story increases you cant leave reading.

On the top of it the Lekhakiya and Short Story in the end is superb.

From my side i give 5 out of 5 star.
Profile Image for Rajiv Smpian.
1 review2 followers
June 16, 2014
सिंगला मर्डर केस का लेखकीय हमेशा की तरह बेजोड़ है और ये आशंका पैदा करता है की भविष्य में पाठक साहब का लेखकीय उनके उपन्यास खरीदने की इकलौती वजह बन सकता है।
बाकी उपन्यास सुनील सीरीज का है जो थोड़ी बहुत कमीबेशी के साथ शानदार है और सुनील से फिर मिलने की चाहत को और भी पुख्ता करता है।
Profile Image for Gurpreet Singh.
31 reviews6 followers
December 16, 2018
एक धीमी गति और अनावश्यक, अतिविस्तारित उपन्यास ।
Profile Image for Rajeev Roshan.
71 reviews14 followers
June 20, 2014
सिंगला मर्डर केस

जीतसिंह के हाहाकारी कारनामे “कोलाबा कांस्पीरेसी” को बाज़ार में आये ४० दिन भी मुश्किल से नहीं हुए थे की पाठक साहब ने “राजा पॉकेट बुक्स” से अपना नया उपन्यास “सिंगला मर्डर केस” भी अपने प्रशंसकों को उपहार स्वरुप दे दिया। हालांकि होली का तोहफा थोडा लेट मिला। लेकिन कहते हैं न, मालिक के घर देर है पर अंधेर नहीं। सुनील के किरदार से मैं हमेशा मुतासिर रहा हूँ। सुनील चक्रवर्ती एक ऐसा किरदार है, जिसे सभी प्रशंसक अपना आदर्श मान सकते हैं। “सिंगला मर्डर केस” सुनील सीरीज में पाठक साहब का १२१ वां उपन्यास है।

“सिंगला मर्डर केस” एक पूर्ण मर्डर-मिस्ट्री है। जिसका केंद्रबिंदु एक क़त्ल है और उससे जुडी सुनील की तहकीकात है। वैसे तो एक शहर में एक दिन में कई क़त्ल होने की संभावना होती है, लेकिन पाठक साहब अपने केंद्रीय किरदार सुनील को उपन्यास की कहानी में इतनी ख़ूबसूरती से घुसाते हैं जिससे पूरा फोकस एक ही केस पर हो जाता है। हालांकि ऐसे किसी केस में पुलिस का दखल तो होता ही है लेकिन “सिंगला मर्डर केस” में सुनील, पुलिस का दायाँ हाथ बना हुआ है। वहीँ पाठकों और सुनील का खासमखास, रमाकांत, इस उपन्यास में सुनील का दायाँ हाथ बनकर कदम-कदम पर सुनील का साथ देता है।

राजनगर में “हिमेश सिंगला” नामक एक स्ट्रोक ब्रोकर का उसके घर में क़त्ल हो जाता है। “हिमेश सिंगला” का बड़ा भाई “शैलेश सिंगला”, सुनील को इस केस में दखल देने के लिए कहता है। जैसे-जैसे सुनील “हिमेश सिंगला” के क़त्ल की तहकीकात करता जाता है, वैसे-वैसे नए-नए तथ्य उजागर होते जाते हैं। साथ ही साथ, क़त्ल के कई सस्पेक्ट भी धीरे-धीरे सामने आते जाते हैं। प्रारंभ में जिस केस में उद्येश और संदिग्धों की कमी थी, उसमे अब उद्येश और संदिग्धों की संख्या बढ़ जाती हुई नज़र आती है।

सुनील के तर्क के अनुसार, कातिल की लम्बाई ५’६” से ५’१०” के बीच है, कातिल पक्का निशानेबाज है, कातिल “हिमेश सिंगला” का करीबी है, कातिल कोई पुरुष है। कहानी के निरंतरता के अनुसार ही सुनील और भी कई तर्कों को उपन्यास में उजागर करता हुआ जाता है।
कहानी में संदिग्धों की कोई कमी नहीं है। मानसी मेहता, जो वारदात के दिन हिमेश सिंगला के साथ डिनर डेट पर थी। हिमेश सिंगला, मानसी मेहता के पीछे हाथ धो कर पड़ा हुआ था। इसी कारण, मानसी मेहता के बॉयफ्रेंड आदित्य कौशल ने हिमेश सिंगला को जान से मार देने की धमकी दी थी। आदित्य कौशल को वारदात के समय हिमेश सिंगला के घर के आसपास अविनाश उपाध्याय ने देखा था। अविनाश उपाध्याय हिमेश सिंगला का करीबी दोस्त था, जिसने हिमेश सिंगला के साथ १० लाख रूपये के जाली चेक से धोखा किया था। लेकिन हिमेश सिंगला ने उसे ९० दिन का समय दिया था उस पैसे को वापिस लौटाने के लिए, जिसकी मियाद हिमेश सिंगला के क़त्ल के तीन दिन बाद समाप्त होने वाली थी।

वहीँ सुनील ने एक थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए, मकतूल हिमेश सिंगला की हाउस-कीपर को भी संदिग्ध की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। जिस दिन क़त्ल हुआ, जहाँ क़त्ल हुआ, जब क़त्ल हुआ, उस समय हाउस-कीपर कमला दयाल दुसरे फ्लोर पर अपने कमरे में सो रही थी और उसे कोई खबर नहीं हुई। ठाकुर सुजान सिंह जो हिमेश सिंगला का पुराना मित्र था, उसकी भी स्थिति और एलिबाई पूर्ण नहीं थी, सुनील ने उसे भी अपनी थ्योरी से संदिग्धों की लिस्ट में खड़ा कर दिया था।

एक क़त्ल, पांच संदिग्ध। पाँचों संदिग्धों के पास हिमेश सिंगला को मारने का उद्येश था। पाँचों संदिग्धों की एलिबाई लचर और कमजोर थी। पुलिस और सुनील ने पाँचों को ड्रिल किया लेकिन कोई भी क़त्ल का इलज़ाम लेने को तैयार नहीं। पुलिस का कातिल को पकड़ने का तरीका होता है – संदिग्धों में से एक-एक को चेक करो और एलेमिनट करते रहो, जो अंत में बचेगा वो कातिल होगा। लेकिन इस कहानी में न पुलिस और न ही सुनील, किसी संदिग्ध पर से अपनी शक की दृष्टि हटा पा रहे थे। “हिमेश सिंगला” के क़त्ल से जुड़ा ऐसा कौन सा टुकड़ा रह गया था, जिसको न जोड़ पाने के कारण कातिल की तलाश नहीं हो पा रही थी। ऐसा क्या कारण था की, सुनील उसी तहकीकात करते हुए उसी जगह पहुँच गया था जहाँ से उसने शुरुआत किया था।

एक अत्यंत उलझी हुई, मकड़ी के जाले की तरह उलझी हुई, मर्डर-मिस्ट्री जिसका कोई अंत नज़र नहीं आता, जब तक आप अंत तक इस उपन्यास को नहीं पढ़ते। कहानी की शुरुआत, एक क़त्ल के तहकीकात से होती है और ख़त्म उस तहकीकात के द्वारा कातिल को पकड़ लिए जाने पर होती है। यह उपन्यास एक मर्डर-मिस्ट्री है लेकिन इसमें पाठक साहब का व्यंगात्मक नजरिया भी दिखाई देता है। सुनील और रमाकांत की सयानी बातें (स्मार्ट टॉक) भी आपका मनोरंजन करती है। प्रभुदयाल और सुनील के बीच की तर्क-वितर्क, जिसमे सुनील अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से प्रभुदयाल पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था। हालांकि, कई प्रशंसकों को यह आशा थी की इस उपन्यास में सुनील और प्रभुदयाल की भयंकर टक्कर होगी लेकिन इस बार भी सभी प्रशंसकों को मायूस होना पड़ा।

इस उपन्यास की सबसे ख़ास बात – इसका लेखकीय था। इस लेखकीय में पाठक साहब ने अपने विस्तृत ज्ञान को महंगाई के बिंदु से लेकर हमारे साथ साझा किया है। जिन प्रशंसकों को इस बात से निराशा हुई थी की “कोलाबा कांस्पीरेसी” में लेखकीय नहीं मिल पाया, उन्हें इस लेखकीय से अभूतपूर्व ख़ुशी होगी।

आप इस उपन्यास को कितने सितारे देते हैं, यह मैं पूछना नहीं ��ाहुगा लेकिन मैं आपको जरूर बताना चाहूँगा की यह उपन्यास ५ सितारों में से पुरे ५ सितारे का हक़दार है।

आभार
राजीव रोशन
Profile Image for शरद श्रीवास्तव.
16 reviews8 followers
June 17, 2014
सिंगला मर्डर केस पाठक साहब द्वारा रचित एक तेजरफ्तार व बेहद रोमांचक उपन्यास है। एक बढ़िया कहानी के साथ सुनील और रमाकांत की दिलचस्प जुगालबंदी इसमे चार चाँद लगाती है। और सोने पर सुहागा इस उपन्यास के साथ दी गयी एक लघु कथा है। लेखकीय के साथ शुरू होती ये कहानी आरंभ मे ही रीडर को अपने साथ बांध लेती है और मजबूर करती है की पूरी कहानी पढ़ने के बाद ही वो और कुछ काम कर पाये। सुनील हमेशा की तरह इस बार भी डैमसेल इन डिस्ट्रेस की मदद को बेकरार है लेकिन कथित डैमसेल उसे घास डालने को राजी नहीं। ऐसा पहली बार होते देखा।

कुल मिला कर 5 मे 5 स्टार। लेखकीय और लघु कथा किसी भी तरह की रेटिंग से ऊपर है, अद्भुत हैं।
1 review1 follower
June 9, 2016
Totally plagiarized copy of The Benson Murder Case by S.S. Van Dine. Deserves a special negative rating for that.
Displaying 1 - 10 of 10 reviews

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