हर कोई हर कुछ कहता रहता है, लोग लेखकों को दया का पात्र समझते हैं, असल में सिर्फ एक लेखक जानता है कि दुनिया में कौन-कौन दया का पात्र है। वो लेखकों का प्यारा और मृदु स्वभाव देखकर समझते हैं कि लेखक लोग बड़े कमजोर होते हैं, यह लोग बेचारे दुनिया को नहीं जानते हैं। और वह बेचारे यह भी नहीं जानते हैं कि लेखक से ज्यादा ताकतवर कोई नहीं होता है, लेखक चाहे तो दुनिया को किसी भी दिशा में मोड़ सकता है। यह सब तो सिर्फ ऊपरी बातें है, यदि कोई लेखक अथवा कवि के मन में उतरे तब वह चौंक जाएगा, तब वह देख पाएगा की दुनिया कैसी है और लेखक क्या है। राम की कृपा से ही मैं भी एक लेखक हूँ और अपने मन की बातें तरीके-तरीकों से लिखा करता हूँ। कहानियां: 1) युद्ध, 2) अंधेरा, 3) लेखक कैसे बनें 4) कोरोना पीड़ित पृथ्वी, 5) आवारा सरपंच या मुखिय