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अनबूझ पहेली.

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मराठी कादंबरी ‘जीवघेणं गुपित’ का अनुबाद.
“अनबूझ पहेली”
जिसने भी इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की, उसकी हत्या हुई!
इसे सुलझाने वाला अब कोई भी जिंदा नहीं है। सिर्फ...
ए सी पी संकर्षण स्वेच्छा निवृत्ती लेने के बाद कोकण में खेत खरीद कर शांति की जिंदगी बसर करने का सपना देख रहे थे। लेकिन पंत ने उन्हे जाने से पहले रवीराज का काम करने की बिनती की, बिनती क्या आज्ञा ही थी। क्योंकि पंत का शब्द उनके सर ऑंखो पर था।
रवीराज की पत्नी, सुगंधा, की मौत पाँच साल पहले हॉटेल के सूट में संदेह जनक स्थिती में हुई थी। उसी वक्त चुनाव घोषित हुए थे। विरोधी पक्ष ने इस वाकिया को इस तरह से जनता के सामने पेश किया, जैसे रवीराज ने ही अपने पत्नी का खून किया हैं। फलस्वरूप उन्हें चुनाव हारना पड़ा था।
अगले चुनाव का वक्त आ गया

329 pages, Kindle Edition

Published March 26, 2024

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Sanjay Kale

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