अलादीन के जादुई चिराग की कथा : hindi novel book : hindi books : hindi novels : hindi story book : hindi story books : hindi novels books : hindi novels ... : hindi book :free books
अलादीन हिम्मत करके गढ़े में कूद पड़ा। सीढ़ियों से उतर कर वह पहले दालान के सामने पहुँचा। वहाँ उस ने अपने कपड़े को कस कर अपने शरीर से लपेट कर बाँध दिया और डरते-डरते दालान में प्रवेश किया कि कहीं उस का कोई वस्त्र दीवार से न छू जाए। दूसरे और तीसरे दालान को भी उस ने इसी तरह डरते-डरते पार किया और फिर बाग में आ कर चैन की साँस ली। बाग के रास्ते से आगे बढ़ता हुआ वह ऊँचे चबूतरे पर बने कमरे में गया तो देखा एक ताक में एक दीया जल रहा है। उस ने उस का तेल-बत्ती फेंक कर उसे वस्त्रों के अंदर सीने से बाँध लिया। फिर वहाँ से उतर कर बाग के रास्ते वापस आने लगा और वहाँ के पेड़ों के फल तोड़े। वे दूर से तो लाल, पीले, हरे, आदि रंगों के फल लगते थे किंतु खेलने के लिए अपनी जेबों में तथा और जहाँ भी संभव हुआ उस ने यह रत्न भर लिए। उस ने अप&