संस्कृत-व्याकरण का संशोधित एवं परिवर्धित पंचम संस्करण पाठकों के हाथों में देते हुए हरदिन प्रसन्नता हो रही है. संपूर्ण भारत में ‘संस्कृत-व्याकरण’ का प्रचार इसकी उपादेयता का परिचायक है. प्रस्तुत संस्करण में कुछ आवश्यक परिवर्तन और परिवर्धन किये गए हैं. इस संस्करण के प्रथम भाग में संपूर्ण लघुसिद्धान्तकौमुदि दी गयी है. तत्पश्चात द्वितीय भाग में सिद्धान्तकौमुदी से करक-प्रकरण, संक्षिप्त वैदिक-व्याकरण, संक्षिप्त प्राकृत-व्याकरण तथा पारिभाषिक शब्दकोश दिए गए हैं.