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Kisse Coffiyana/किस्से कॉफ़ियाना

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इस कहानी संग्रह की 26 कहानियाँ भावों, दृश्यों और जीवन स्थितियों का एक सुंदर कोलाज बनाती हैं, जिसके इंद्रधनुषी रंग मन ही नहीं, आत्मा तक को छूने, भिगोने, अभिभूत करने और झकझोरने का काम करते हैं। इन कहानियों के पाठ का प्रभाव भी अपने-आप में अनूठा ही होता है। जहाँ “नवरात्र पूजा” संबंधों की मनोवैज्ञानिक गुत्थियों से मिलवाती है तो “एकदा एक्स” प्रेम के आयाम को बड़ा करने की कुंजी पेश करती है, वहीं “दो चाँद और तीन कहानियाँ” में कथाकार युवा मन की दुर्लभ थाह लेते हुए पाठक को अपने साथ गहराई तक ले जाता है।
संजीदा पाठकों को दुष्यन्त के उजले-स्याह किरदारों और उनके बहुरंगी कारनामों में मानव सभ्यता के भविष्य की आहटें भी मिलती हैं। यही विविधता समकालीन भारतीय लेखकों में उनको विशिष्ट पहचान देती है।

171 pages, Kindle Edition

Published April 22, 2024

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32 reviews
November 24, 2024
समीक्षा : किस्से कॉफ़ियाना (कहानी संग्रह)
लेखक : दुष्यन्त जी
प्रकाशक : पेंगुइन स्वदेश प्रकाशन
प्रथम संस्करण : 2024
____//___

दुनिया के हर इंसान अपने साथ कई सारी कहानियां लेकर चलता है, कुछ में वो ख़ुद मुख्य किरदार है तो कुछ में बस एक मामूली सा पात्र , मगर एक कहानियां है, थी और आगे हर पल बुनती जा रही है। जीवन की इसी छांव तले दुष्यन्त जी ने कुछ 26 छोटी बड़ी कहानियों को हमारे सामने "किस्से कॉफ़ियाना" नाम की किताब की शक्ल में रखा है जिसे पेंगुइन स्वदेश ने प्रकाशित किया है। 26 कहानियों को दो खंड में बांटा गया है जिसमें पहले खंड में छोटी कहानियां है वहीं दूसरे में बड़ी कहानियां, मेरा सुझाव है आप दूसरा खंड पहले पढ़ें क्योंकि इससे आप और अच्छे से समझ पाएंगे लेखक को भी और उनके लेखन को भी। अब अगर कहानियों की बात करें तो सभी 26 कहानियों में आपकों किरदारों के बीच की बातचीत पर ज्यादा फ़ोकस किया गया है और उनके बीच के संवादों के जरिए सामाजिक मुद्दों से लेकर अपने अंदर मन की उलझनों तक पर गहराई से बात करी गई है, जैसे "डायरी: जुलाई की एक रात" कहानी में अवसाद जैसे गंभीर विषय को एक्सप्लोर करा गया है वहीं "ये भी समय है" कहानी में कॉरपोरेट लाइफ , नॉस्टेलजिया के साथ देश दुनिया की भी बात करती है। इस पूरे संग्रह की सबसे कमाल कहानी मुझे "कबूतर" लगी जिसे बड़ी आसानी से एक बहुत ही मज़ेदार और सार्थक नाटक के रूप में भी लिखा जा सकता है और मेरा यही आग्रह रहेगा दुष्यन्त जी से की इसे जरूर नाटक के रूप में जरूर लिखे। " कबूतर " कहानी का विषय इतना ज्यादा आज के समय के लिए जरूरी है कि आप इसे पढ़ते हुए भी अपने आसपास के माहौल के बारे में फिर से सोचना शुरू कर देंगे। भाषा और धर्म , मज़हब और सरकारी तंत्र को पर सवाल जवाब करती ये कहानी कई जरूरी सवाल भी उठाती है और कई हिस्से एक मुस्कान सी भी छोड़ जाती है आपके चेहरे पर। इसके अलावा "एकदा एक्स" , "तीसरे कमरे को छत, पांचवीं सीढ़ी और बारहवां सपना", "दरवाजा", "मुस्कुराती हुई लड़की", "प्रेम की उपकथा", और "दो चाँद और तीन कहानियां " मेरी पसंदीदा कहानियां रही इस संग्रह की। एक और खास बात जो इस संग्रह का अनुभव और बड़ा देती है वो है दुष्यन्त जी का लेखन जिसमें उन्होंने किरदारों को उनकी भाषा का फ्लेवर दिया है जो जहां का है जैसा है वैसे ही संवाद उपयोग करता है जिससे कहानी का स्वाद और बढ़ जाता है। कमी की बात करें तो कुछ कहानियां मुझे बहुत ही नीरस सी लगी जैसे " प्रेम का देह गीत" वगैराह जिनको पार करना थोड़ा मुश्किल लगता है। अगर आप भी एक अच्छा कहानी संग्रह पढ़ने की इच्छा रखते है तो "किस्से कॉफ़ियाना" को जरूर मंगवाए और पढ़ लीजिए यक़ीनन निराश नहीं होंगे। दुष्यन्त जी को भी मेरी ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं इस संग्रह के लिए।
आप भी किस्से कॉफ़ियाना को ऑनलाइन ऑर्डर करें और जरूर पढ़ें।

- साहित्ययात्री
(२४/११/२०२४)
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