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कोई रहता है आसमान में क्या
This book contains articles about Jaun Elia that help readers understand him closely, spend time with his life, and make it easier for them to understand his poetry and perspectives.
282 pages, Paperback
Published May 9, 2023
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March 7, 2025
'जाैन' ही तो है 'जौन' के दरपय
'मीर' को 'मीर' ही से खतरा है
यह किताब जौन एलिया पर उनके समकालीन अदीबों के लेखों का संग्रह है। ये अदीब उसके दोस्त या करीबी भी थे, इसलिए ये लेख आलोचना न हो कर रेखा-चित्र बन गए हैं। उर्दू से तर्जुमा की हुई इस किताब से जौन की शायरी के इलावा उसके जीवन-दर्शन पर भी बेशुमार नई बातें सामने आती हैं, और उसके व्यक्तिगत और अदबी, इल्मी जेहन को समझने में मदद मिलती है।
बेतकल्लुफ अंदाज में शायराना बात करने वाले और हिंदुस्तान (अमरोहा) को आखीरी दम तक याद करने वाले जौन की जिंदगी के काफी पन्ने इस किताब में पिरोए हैं। उनकी जबान का लहजा, उनकी मुहब्बतों का धुआं और उनकी दोस्ती के कई किस्से भी यहां मौजूद हैं। एक बेहतरीन बायोग्राफिकल किताब है यह।
ये है इक जब्र, इत्तिफाक़ नहीं
जौन होना कोई मजाक नहीं
'मीर' को 'मीर' ही से खतरा है
यह किताब जौन एलिया पर उनके समकालीन अदीबों के लेखों का संग्रह है। ये अदीब उसके दोस्त या करीबी भी थे, इसलिए ये लेख आलोचना न हो कर रेखा-चित्र बन गए हैं। उर्दू से तर्जुमा की हुई इस किताब से जौन की शायरी के इलावा उसके जीवन-दर्शन पर भी बेशुमार नई बातें सामने आती हैं, और उसके व्यक्तिगत और अदबी, इल्मी जेहन को समझने में मदद मिलती है।
बेतकल्लुफ अंदाज में शायराना बात करने वाले और हिंदुस्तान (अमरोहा) को आखीरी दम तक याद करने वाले जौन की जिंदगी के काफी पन्ने इस किताब में पिरोए हैं। उनकी जबान का लहजा, उनकी मुहब्बतों का धुआं और उनकी दोस्ती के कई किस्से भी यहां मौजूद हैं। एक बेहतरीन बायोग्राफिकल किताब है यह।
ये है इक जब्र, इत्तिफाक़ नहीं
जौन होना कोई मजाक नहीं
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