उस चुड़ैल की दास्तान जो जाने कब से प्रेत-योनि में भटकती फिर रही थी... किसी 'शै' की 'तलाश' में... और उसकी इस तलाश में उसका जोड़ीदार था, एक तेरह वर्षीय किशोर।
कथानक को अनावश्यक रूप से खींचा गया है जो कि उपन्यास के रोमांच को कम कर देता है। अन्यवश्यक प्रसंग हटा दिए जाते तो यह एक रोचक उपन्यास बन सकता था। विस्तृत टिप्पणी: चुड़ैल