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ब्रह्मावली: ब्रह्मांड रहस्य (Bramha Katha Book 2)

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परमब्रह्म ने जब सृष्टि की रचना का विचार किया, तो उन्होंने सभी सप्ततत्वों को उनका स्वयं का मस्तिष्क देकर अपने श्रेष्ठ रुप में आने को कहा। सहस्त्रों वर्षों के असीम ज्ञान के पश्चात् सभी सप्ततत्वों में से अग्नि ने अपना सर्वश्रेष्ठ रुप प्राप्त कर लिया। फलस्वरुप परमब्रह्म व माता आदिशक्ति ने ‘अग्निमंथन’ का विचार किया। इस अग्निमंथन के प्रभाव से 14 दिव्य रत्नों की प्राप्ति हुई। यह 14 रत्न स्वयं में दिव्य शक्तियाँ समेटे हुए थे। अब परमब्रह्म ने इन दिव्य शक्तियों की सुरक्षा का भार एक ऐसी अद्भुत शक्ति को दिया, जिसका नाम स्वर्णिम था और जो स्वयं इस अग्निमंथन से प्रकट हुई थी। स्वर्णिम ने इन सभी 14 रत्नों को ब्रह्मावली नामक एक दिव्य संदूक में छिपा दिया। कोई दुष्ट जीव इस दिव्य संदूक को प्राप्त ना क

491 pages, Kindle Edition

Published June 30, 2024

2 people are currently reading

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Shivendra Suryavanshi

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