दुनिया में बहुत से लोग हैं, जो औरों से अपना असली चेहरा छिपा कर रखते हैं। वे होते कुछ और हैं, पर अपने आप को दिखाते कुछ और हैं। ऐसी लोगों की ज़ुबान पर कुछ और होता है और दिल में कुछ और।
ऐसे लोग दुनिया को दिखाते हैं कि वो बहुत अच्छे इंसान हैं और वे अच्छा इंसान होने का हर ढोंग करते हैं, लेकिन अंदर से ऐसे लोग बहुत काले मन के, दूसरों को धोखा देने वाले और नुकसान पहुंचाने वाले लोग होते हैं।
‘मुंह में राम, बगल में छुरी’ वाली कहावत को चरितार्थ करता ये उपन्यास ऐसे ही कुछ किरदारों की कहानी है।
कहनी की शुरुआत होती है कविता नाम की महिला से जो अपनी जान बचाने के लिए अपने ही पति की हत्या कर के फरार हो जाती है। उसके बाद विभिन्न मोड़ों से होती हुई कहानी जब अपने अंजाम पर पहुँचती है, तो नकली च&