बड़े शहर के व्यस्त शहर में, एक छोटे और तंग मकान में, सुजाता अपने छह साल के बेटे आर्यन के साथ रहती थी। वह विधवा थी; उसके पति की मौत तीन साल पहले एक हादसे में हो गई थी। सुजाता का जीवन घर-घर जाकर काम करने से चलता था—वह फर्श साफ करती, खाना बनाती, और कपड़े धोती थी। उसकी पूरी दिनचर्या कड़ी मेहनत में गुजरती थी, और उसके सपने उसकी जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गए थे।
दूसरी तरफ, एक अमीर अच्छे घर में 22 साल का लड़का आरव रहता था, जो प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी में साहित्य पढ़ता था। वह एक सपने देखने वाला लड़का थì