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Mithakon Se Vigyan Tak

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Paperback

Published January 1, 2024

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Gauhar Raza

9 books2 followers

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Displaying 1 - 6 of 6 reviews
3 reviews
July 5, 2025
मै लेखक के बारे में पहले से नहीं जानती थी पर इस टॉपिक के बारे थोड़ा बहुत अंदाजा था, शुरू शुरू में लगा कि यह किताब विज्ञान और धर्म की लड़ाई है जिसमें जाहिर है कि विज्ञान की जीत बताया होगा और जैसा कि हमें पता है कि इस वक्त धर्म सबसे संवेदनशील मुद्दा बन चुका है ऐसे में राइटर का नाम भी ध्यान खींचता है । खैर ये सब मेरे पूर्वाग्रह थे इस किताब को पढ़ने के पहले ।
मेरी समझ में राइटर ने बैलेंस करने की कोशिश की है कि सभी धर्मों में रही मान्यताओं को चिन्हित कर, खाशकर यह किताब ब्रह्मांड के उत्पत्ति और उसके विकास के बारे में वैज्ञानिक तथ्य और धार्मिक मान्यताओं दोनों को विस्तार में चर्चा करता है ।
राइटर का मानना है कि मनुष्य पूरे ब्रह्मांड में न के बराबर अस्तित्व रखते हुए भी इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरू से ही इसने सवाल पूछे और उसके जवाब भी ढूंढने की कोशिश की । उन सवालों के धर्म और विज्ञान ने अलग अलग जवाब दिए, जिससे जाहिर है धर्म और विज्ञान में विरोधाभास पैदा हुआ । जैसे धर्म ने एक तरफ कहा कि सृष्टि की रचना 6 दिन में हुई , यह कछुए की पीठ पे टिकी है इत्यादि तो वही विज्ञान ने डार्विन का सिद्धांत बिग बैंग थ्योरी दी । इस प्रक्रिया के दौरान ही ब्रूनो को यह कहने पे कि धरती ब्रह्मांड के केंद्र में नहीं बल्कि सूर्य है कुछ धर्म के ठेकेदारों ने इन्हें जिंदा जला दिया , पर एक तरफ विज्ञान सत्य है ऐसे मानने वाले बहुत कम हो तब भी इसका अस्तित्व बना रहता दूसरी तरफ धर्म की सत्यता उसकी लोकप्रियता पर निर्भर है ।
राइटर ने कहा कि जहां विज्ञान का अंत होता है वहां से धर्म की शुरुआत होती । यह पक्ति धर्म को विज्ञान से श्रेष्ठ बनाती है पर गौहर रज़ा कहते है कि इसका मतलब विज्ञान जहां तक अपना विस्तार करता है वहां तक धर्म की श्रेष्ठता को धूमिल कर देता ,धर्म unexplored साइंस है आने वाले वक्त में जैसे जैसे विज्ञान का दायरा बढ़ता जाएगा धर्म का दायरा सिकुड़ता जाएगा ।विज्ञान ऐसा ज्ञान है जिसे चुनौती दी जा सकती है पर धर्म को नहीं , जैसे अगर गंगा का पानी आज साफ है ऐसा कह रहे वैज्ञानिक तो कल फिर से कह सकते है कि अब ये दूषित हो गया गंगा का पानी अब साफ नहीं रहा परन्तु अगर धर्म ने यह कह दिया कि गंगा का पानी पवित्र है तो है । विज्ञान के मामले में सबसे नए और आधुनिक ज्ञान पर विश्वाश किया जाता है परन्तु धर्म में जितना पुराना ग्रन्थ उतना ही श्रेष्ठ ।
अंततोगत्वा , यह पुस्तक कहती है कि धर्म और विज्ञान पूरी तरह विरोधाभाषी तो नहीं है परन्तु विज्ञान ने सच को चुना है भावना से परे लेकिन धर्म ने हमेशा भावना को चुना , विज्ञान का प्रसार अभी जारी है और रहेगा पर धर्म के अनुसार सभी ज्ञान प्राप्त किए जा चुके है ।
यह पुस्तक बहुत ही बारीकी से विज्ञान और धर्म को इस ब्रह्मांड के उत्पत्ति के आधार के विचारों पर परीक्षण करता है , यह पूर्णतः सत्य है कि विज्ञान ने हमारे जीवनशैली को आसान बनाया और धर्म ने हमारे जीवन को संतुष्ट , जब तक कि विज्ञान यह दावा नहीं करता कि उसने ब्रह्मांड के सारे ज्ञान की खोज कर ली है मनुष्य को धर्म की जरूरत रहेगी , एक तरफ यह माना जाता है कि दुनिया में धर्म के नाम पर हिंसा एक नकारात्मक पहलू है जो कि सच भी है पर परमाणु बम जो कि हिंसा के सारे हद को पार कर चुका है एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है विज्ञान पर।
Profile Image for Rajesh Kamboj.
13 reviews1 follower
September 16, 2025
समीक्षा: "मिथकों से विज्ञान तक" – गौहर रज़ा

पुस्तक की आरम्भिक कविता मेरी अपेक्षाओं के अनुरूप प्रभावशाली नहीं लगी। लेखक ने मिथकों के विषय में उतना गहराई से नहीं लिखा जितनी सम्भावना थी। संपूर्ण प्रस्तुति में मौलिकता का अभाव दिखाई देता है और यह कई अन्य पुस्तकों, विशेषकर युवाल नोआ हरारी की सैपियन्स से प्रेरित प्रतीत होती है।

अंत में यह भी स्पष्ट होता है कि लेखक को हिंदी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं था और इस कारण लेखन और संशोधन का अधिकतर कार्य उनके सहयोगियों ने किया। हिंदी में इस विषय पर कोई अन्य पुस्तक उपलब्ध न होने के कारण ही इसे हिंदी में प्रस्तुत किया गया है।

संभवतः मैंने पहले से ही इस विषय पर बहुत पढ़ लिया है, इसी कारण यह पुस्तक मुझे उतनी रुचिकर नहीं लगी। फिर भी, हिंदी में इस दिशा की एक पहल के रूप में मैं इसे ५ में से ४ अंक देता हूँ। आशा है कि भविष्य में कोई ऐसा लेखक, जिसे विषय और भाषा दोनों पर अधिक सुदृढ़ पकड़ हो, इस आरम्भ को आगे ले जाएगा।
2 reviews
May 3, 2025
Summarized version to differentiate myths and science. Must read in current times to identify what science actually is.
1 review
July 1, 2025
Overall Book is good but sometimes I can't agree with writer because I've some proof that the writer have written things are wrong. most of the time Raza ji right.
13 reviews
November 24, 2024
The book is written in a simple language and very effective in understanding the concept and ways of science. Excellent book for understanding the difference between scientific approach and a non scientific understanding. Must read for millennials, Gen Z and Gen alpha who use technology extensively but do not understand the laws of nature behind it and believe some almighty is controlling the universe.
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