ऋणजल-धनजल फणीश्वर नाथ 'रेणु' द्वारा कृत एक रिपोर्ताज है|
रेणु को पढ़ना एक सौभाग्य है | ऋणजल-धनजल के दूसरे अध्याय में भीष्ण सूखे का विवरण है, अद्वितीय लेखन का प्रमाण है| दुःख सिर्फ इतना है की समय बीता है , बहुत समय बीता है, पर बदला कुछ नहीं है इतने बीते समय में | रेणु होते तो आज भी लिखते ऐसे रिपोर्ताज| गांव की दशा आज भी वैसी ही है, पूरे देश में और दुर्भाग्य है की मानवता भी अब तेजी से कम होती जा रही है|
पढ़िए, अगर कुछ नए ढंग का पढ़ना है| पढ़िए इसे अगर कुछ अच्छा पढ़ना है |