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ऋणजल-धनजल

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HINDI
111

112 pages, Paperback

Published January 1, 2005

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About the author

Phanishwar Nath 'Renu' (4 March 1921 – 11 April 1977) was one of the most successful and influential writers of modern Hindi literature in the post-Premchand era. He is the author of Maila Anchal, which after Premchand's Godaan, is regarded as the most significant Hindi novel.

हिन्दी कथा-साहित्य को सांगीतिक भाषा से समृद्ध करनेवाले फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गाँव में 4 मार्च, 1921 को हुआ। लेखन और जीवन, दोनों में दमन और शोषण के विरुद्ध आजीवन संघर्ष के प्रतिबद्ध रेणु ने राजनीति में भी सक्रिय हिस्सेदारी की। 1942 के भारतीय स्वाधीनता-संग्राम में एक प्रमुख सेनानी की हैसियत से शामिल रहे। 1950 में नेपाली जनता को राणाशाही के दमन और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए वहाँ की सशस्त्र क्रान्ति और राजनीति में सक्रिय योगदान। 1952-53 में दीर्घकालीन रोगग्रस्तता के बाद राजनीति की अपेक्षा साहित्य-सृजन की ओर अधिकाधिक झुकाव। 1954 में बहुचर्चित उपन्यास मैला आँचल का प्रकाशन। कथा-साहित्य के अतिरिक्त संस्मरण, रेखाचित्र और रिपोर्ताज़ आदि विधाओं में भी लिखा। व्यक्ति और कृतिकार, दोनों ही रूपों में अप्रतिम। जीवन की सांध्य वेला में राजनीतिक आन्दोलन से पुनः गहरा जुड़ाव। जे.पी. के साथ पुलिस दमन के शिकार हुए और जेल गए। सत्ता के दमनचक्र के विरोध में पद्मश्री लौटा दी।

मैला आँचल के अतिरिक्त आपके प्रमुख उपन्यास हैं: परती परिकथा और दीर्घतपा; ठुमरी, अगिनखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप तथा सम्पूर्ण कहानियाँ में कहानियाँ संकलित हैं। संस्मरणात्मक पुस्तकें हैं: ऋणजल धनजल, वन तुलसी की गन्ध, श्रुत-अश्रुत पूर्व। नेपाली क्रान्ति-कथा चर्चित रिपोर्ताज है।,

भारत यायावर द्वारा सम्पादित रेणु रचनावली में फणीश्वरनाथ रेणु का सम्पूर्ण रचना-कर्म पाँच खंडों में प्रस्तुत किया गया है।

11 अप्रैल, 1977 को देहावसान।

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Profile Image for Amit Tiwary.
478 reviews45 followers
June 3, 2019
ऋणजल-धनजल फणीश्वर नाथ 'रेणु' द्वारा कृत एक रिपोर्ताज है|

रेणु को पढ़ना एक सौभाग्य है | ऋणजल-धनजल के दूसरे अध्याय में भीष्ण सूखे का विवरण है, अद्वितीय लेखन का प्रमाण है| दुःख सिर्फ इतना है की समय बीता है , बहुत समय बीता है, पर बदला कुछ नहीं है इतने बीते समय में | रेणु होते तो आज भी लिखते ऐसे रिपोर्ताज| गांव की दशा आज भी वैसी ही है, पूरे देश में और दुर्भाग्य है की मानवता भी अब तेजी से कम होती जा रही है|
पढ़िए, अगर कुछ नए ढंग का पढ़ना है| पढ़िए इसे अगर कुछ अच्छा पढ़ना है |
Profile Image for Satyam Pandey.
9 reviews2 followers
November 4, 2020
फणीश्वर नाथ रेणु ने इस पुस्तक में बिहार की दो कहानियों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है। जिसमें पटना की बाढ़, जो 1975 में आई थी और दूसरा अकाल का वर्णन है। इस पुस्तक में कही-कही आम बोलचाल की भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है। एक हिंदी पाठक के तौर पर मैं इस पुस्तक की हिंदी से काफ़ी कुछ सीखा हूं।
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