शहर की भीड़-भाड़ में त्योहार के समय की यह कहानी संगिता की है, जो एक साधारण महिला है और अपने परिवार का ध्यान रखते हुए अपने अंदर छुपी ख्वाहिशों से भी जूझ रही है। जब दीवाली पर उसका भतीजा विजय उनके घर आता है, तो उनके बीच एक अलग सा लगाव लगने लगता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता ही जाता है। पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक नियमों के बावजूद, दोनों एक-दूसरे के करीब आते जाते हैं। यह कहानी उनके दिल के जज़्बातों, छुपी हुई ख्वाहिशों, और उन सीमाओं को पार करने की है, जिन्हें समाज ने तय किया है।
१. संगीता एक प्यारी महिला २. संगीता की पतली कमर का स्पर्श ३. स्वादिष्ट संगीता आंटी ४. बाथरूम में संगीता आंटी ५. अंकल ने लूटे आंटी के मजे ६. विजय का पछताना ७. विजय ने आंटी को चूमा ८. संगीता आंटी की शिक्षा ९.