"इज्ज़त और सच्चाई के बीच की इस जंग में कौन जीतेगा?"
लांछन प्रियल की कहानी है, एक ऐसी महिला जो अपने पति पीयूष की उपेक्षा और समाज की कठोर अपेक्षाओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश करती है। शादी के वर्षों बाद भी पीयूष की समस्याओं के कारण मातृत्व सुख से वंचित प्रियल को अपनी सासू माँ की उम्मीदों और तानों का सामना करना पड़ता है। तभी उसके जीवन में उसका पहला प्रेम, प्रभास, लौटता है और उसके दिल में मातृत्व की चाहत एक नए राह पर ले जाती है।
क्या प्रियल अपनी मर्यादा और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना पाएगी? क्या प्रभास के साथ का निर्णय उसे उस खुशी तक पहुंचाएगा, जिसका इंतजार वह बरसों से कर रही है?
लांछन एक साहसी स्त्री की सशक्त कहानी है, जो समाज के लांछनों से परे खुद की राह चुनती है।