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Thakurbadi

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Profile Image for Raj Bairwa.
32 reviews
December 30, 2024
समीक्षा : ठाकुरबाड़ी (नॉन-फिक्शन)
लेखक : अनिमेष मुखर्जी
प्रकाशक : पेंगुइन स्वदेश
प्रथम संस्करण : 2024
कुल पृष्ठ : 199

इतिहास में विचरण करना मेरे लिए सदा से एक ऐसी यात्रा रही है, जो समय के गलियारों में प्रवेश कर भूतकाल के स्पर्श का अनुभव कराती है। इसका रसास्वादन इस बात पर निर्भर करता है कि उस यात्रा का केंद्र कौन है। इतिहास की विशेषता यह है कि यह समय के साथ और गहराई में समाहित होता चला जाता है।
रबींद्रनाथ टैगोर के जीवन, उनके परिवार और वंश की कथा को यदि आप सरलता और एक अद्वितीय नॉस्टैल्जिक भावना के साथ पढ़ना चाहें, तो अनिमेष मुखर्जी द्वारा लिखित "ठाकुरबाड़ी" निश्चित रूप से आपके हृदय को प्रसन्नता से भर देगी।

पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक रबींद्रनाथ टैगोर की तीन पीढ़ियों की कहानी तो प्रस्तुत करती ही है, साथ ही इसे भारत के इतिहास के व्यापक परिप्रेक्ष्य से जोड़कर भी पेश करती है। विभाजन से पूर्व उनके योगदान से लेकर नाम और धर्म परिवर्तन की कहानियों तक, लेखक ने तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ इसे पाठकों के समक्ष रखा है।

पुस्तक 15 अध्यायों में विभाजित है, जिनमें हर अध्याय में समय के विविध खंडों के माध्यम से टैगोर परिवार की गाथा उकेरी गई है। शर्मिला टैगोर और देविका रानी के बीच जुड़े अनछुए सूत्रों का उल्लेख पुस्तक के अंत में मिलता है, जिसे पढ़ना किसी सिनेमाई अनुभव से कम नहीं है। यदि आपने अमेज़न की वेब सीरीज़ जुबिली देखी हो, तो कुछ जानकारी परिचित प्रतीत हो सकती है।

इस पुस्तक की रोचकता इसके समृद्ध संदर्भों में है। चाहे महात्मा गांधी के खादी आंदोलन का उल्लेख हो, सत्यजीत रे और मंटो से जुड़े किस्से हों, या राजा राममोहन राय और मीना कुमारी जैसे व्यक्तित्वों की झलक—ठाकुरबाड़ी पाठकों को एक गहन साहित्यिक यात्रा पर ले जाती है। सबसे उल्लेखनीय यह है कि पुस्तक के अंत में अधिकांश दावों के संदर्भ स्रोतों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जो इसे शोध और साहित्यिक दृष्टिकोण से प्रामाणिक बनाता है।

अनिमेष मुखर्जी को इस अमूल्य कृति के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पुस्तक न केवल साहित्य के प्रेमियों के लिए अपितु इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। यह अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।

- साहित्ययात्री
(३०/१२/२०२४)
Profile Image for Manish Sain.
22 reviews
April 1, 2025
I liked the book for its flow and anecdotes. As a non-bengali, my knowledge of the Tagore family is restricted to Rabindranath Tagore or Abanindranath Tagore. It's really refreshing to read about the other members of the illustrious family, especially its women. The writing style is quite conversational, which I found distracting at times but it does make for a quick read.
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