नये अनुभव, उपलब्धियाँ, नये संबंध, दुविधायें और सतत चलते रहना; यह तो जीवन की रीत है इस यात्रा के कई सोपान सरल होते हैं तो कई कठिन, कभी हम कृतज्ञता और आशा से भर उठते हैं तो कभी निराशा से इन उद्बोधित अवस्था में हम सहज अपने हृदयतल को टटोलते हैं, और वहाँ मिलता क्या है - वह सहज सरल वात्सल्य, वह आशा एवं प्रेरणा भरे शब्द, किस्से और कहानियाँ जो माँ ने वर्षों पहले सुनायी थीँ हमारी प्रेरणा, जिजीविषा, परिस्थितियों से जूझकर प्रगति करते रहने का स्रोत वहीँ मिलता है
फिर हृदय की गहराइयों में उत्प्रेरित भाव शब्दों में ओत प्रोत हो कविता का रूप ले लेते हैं और कभी रेखाओं व रंगों में समाहित होकर चित्रों का
मैं जानता हूँ माँ, मेरे बिन कहे तू समझ जाती है फिर भी चाहूँ लिखना उन बातों को और अभिव्यक्ति करना, चित्रों