खानाबदोश में अहमद फ़राज़ की ग़ज़लों की दस किताबों को एक साथ पेश किया गया है। उनकी तमाम बेहतरीन शायरी इस किताब में है, साथ ही कुछ ताज़ा ग़ज़लें भी। दस किताबें इस तरह हैं - नई ग़ज़लें दर्द आशोब बेआवाज गली कूचों में ख़्वाबे-गुल परीशां है जानां-जानां नाबीना शहर में आईना नायाफ़्त पस अंदाज मौसम गजल बहाना करूं तन्हा-तन्हा
उर्दू दुनिया यानी पाकिस्तान-हिंदुस्तान के बड़े शायर हैं फ़राज जिनकी शायरी दिलो-दिमाग को नए जज्बों और एहसास से रु-ब-रु कराती है। सरहदों से बेपरवाह उनकी शायरी आम लोगों के दुख-दर्द और हंसी-खुशी की जबान है। जैसे फैज, वैसे ही फ़राज़ में यह साफ पहचाना जा सकता है कि सरहदों से पार और उनके बावजूद, हमारे समय में हम जिन प्रश्नों, अंतर्विरोधों और बेचैनियों से घिरे हैं, उन्हें उसकी शायरी सीधे और निहायत आत्मीय जबान में संबोधित करती है।
ये क्या कि सबसे बयां दिल की हालतें करनी 'फ़राज़' तुझको न आई मोहब्बतें करनी... कभी 'फ़राज़' नए मौसमों में रो देना कभी तलाश पुरानी रिफाकतें करनी।