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मैं थिगली में लिपटी थेर हूँ : Main Thigli Mein Lipti Ther Hoon

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मैं थिगली में लिपटी थेर हूँ—फटे-पुराने कपड़ों में लिपटी एक बौद्धिक स्त्री या कहूँ तो बौद्ध भिक्षुणी। बुद्ध का मुझ पर बहुत प्रभाव रहा है। मैं बुद्ध को अपने बहुत क़रीब पाती हूँ।

थेरी—वह बौद्ध भिक्षुणियाँ जो ज्ञान की तलाश में बुद्ध से जुड़ीं। वे बुद्धकालीन थीं और गौतम बुद्ध की शिष्याएँ थीं। थेरी गाथाएँ समाज में स्त्री की स्थिति को जानने एवं समझने के लिए महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं। कविताओं में इन स्त्रियों का भी प्रभाव रहा।

मेरी कविताएँ आमजन की कविता हैं। रास्ते चलते हुए जिन चीज़ों को महसूस कर पाई उन विषयों पर लिखती चली गई। बिना उकेरे बेचैनी का कोई समाधान भी नहीं था। उन पीड़ाओं से उबरने का एक ही रास्ता माकूल लगा, वह था—लेखन।

कुछ मित्र भी जीवन में रहे जिन्होंने मेरे मनोबल को हमेशा बढ़ाया है। कठिन दिनों में वे हमेशा संबल की तरह मेरे साथ रहे। उन सभी को शुक्रिया न कहते हुए प्रेम का फाहा देना चाहूँगी। वह हमेशा मेरे साथ यूँ ही बने रहें।

ज्योति रीता

134 pages, Kindle Edition

Published January 23, 2025

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Jyoti Rita

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