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धुंधलके के उस पार

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किताब के बारे में

"धुंधलके के पार" एक ऐसी कहानी है जो आपको रहस्य, रोमांच, और मानवीय रिश्तों की गहराई में ले जाती है। यह कहानी श्रुति नाम की एक युवा लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन से अपनी माँ के बारे में जानने की उत्कट इच्छा रखती है। श्रुति के जीवन में माँ की अनुपस्थिति एक खालीपन की तरह है, जिसे वह भरने के लिए तरसती है।श्रुति के घर में उसकी माँ की कोई तस्वीर, कोई निशानी, या उनसे जुड़ी कोई भी चीज़ नहीं है। यह सब एक गहरे रहस्य में डूबा हुआ है। जब भी श्रुति अपने पिता से माँ के बारे में पूछती है, तो वे सिर्फ इतना कहते हैं कि तुम्हारी माँ तुम्हारे ही तरह दिखती थी और तुम्हारे जन्म के समय ही उसका देहांत हो गया। उनके चेहरे पर गहरी उदासी और आवाज़ में दर्द श्रुति को और सवाल पूछने से रोक देता है।

107 pages, Kindle Edition

Published February 28, 2025

About the author

Ashok Bhatnagar

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