कोई दूसरा साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत असमिया काव्य-संग्रह आन एजन का हिंदी अनुवाद है। समकालीन असमिया कविता के प्रमुख स्वर हरेकृष्ण डेका द्वारा रचित इस काव्य-संग्रह में 30 कविताएँ संकलित हैं। व्यक्तिगत द्वंद, कशमकश और संशय की निरपेक्ष प्रस्तुति इस संकलन की कविताओं को अलग ही सौंदर्य प्रदान करती है। सूक्ष्म हास्य, महानगरीय जीवन, आतंकमय परिवेश का जिस चेतन दृष्टिकोण के साथ चित्रण हुआ है, वह इन कविताओं के पठन को एक यादगार अनुभव बना देता है। उनकी कविताएँ एक सपने या स्मृति की तरह खंडित टुकड़े हैं। ये कविताएं संजीदगी के साथ वास्तविकताओं की खोज करती हैं जो मन को प्रभावित करती हैं। हिंसा या आपदा, प्रकृति के भयावह रंग, आने वाली आपदा से बेखबर बच्चे आदि अनगिनत विषयों के चित्र हम उनकी कविताओं में देख सकते हैं। अनुभव का यह मर्मस्पर्शी संसार आधुनिक जीवन के हाथों छिन्न-भिन्न होती पृथ्वी के स्वरूप पर एक शब्द भी व्यर्थ गवाएँ और बिना किसी अतिश्योक्ति के संवेदनशीलता से अपनी राय रखता है।