स्थापत्य की दृष्टि से भारत में गोंड राजवंशों के काल में आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है। विभिन्न गोंड राजवंशों ने मध्यभारत के एक विशाल भूभाग पर अपना शासन स्थापित किया, जिनके अनेकानेक प्रतापी और शासकों ने जहां प्रशासन और राजनीति में अपनी कुशलता सिद्ध की वहीं दूसरी ओर ऐसी महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण भी कराया जो उनकी सुरुचि सम्पन्न दृष्टि को स्पष्ट करती है। इस काल की महत्वपूर्ण संरचनाएं सिंगोरगढ़, चौरागढ़, रामनगर, देवगढ़, जबलपुर, खेरला, गिन्नोरगढ़, मकड़ाई और भोपाल जैसे अनेक स्थानों से प्राप्त होती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में गोंड राजवंशों से संबन्धित इन स्थानों पर पाये जाने वाले स्मारकों का विशद् विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह रचना जहाँ हमारे गौरवशाली अतीत से हमें परिचित कराती है वहीं इन स्मारकों के संरक्षण हेतु नागरिक भागीदारी को प्रेरित भी करती है।