Jump to ratings and reviews
Rate this book

1857 हमने सुनी कहानी थी : 1857 hamne sunee kahanee thee (Bonzuri Prime)

Rate this book
सन सत्तावन पर सैकड़ों किताबें लिखी गयी, और आज भी लिखी जा रही है। मंगल पांडे के कोर्ट मार्शल में शब्दशः क्या हुआ था? क्या तात्या टोपे को पकड़ने में ब्रिटिश सफल रहे? सिंधिया का ब्रिटिशों से मिला होना किस तरह देखा जा सकता है? आखिरी मुगल बादशाह की भूमिका क्या थी? वयोवृद्ध कुंवर सिंह ने किन हालातों में कमान संभाली? नाना साहेब के साथ अंततः क्या हुआ? रानी लक्ष्मीबाई के बारे में अंग्रेजों ने क्या लिखा? क्या यह संग्राम किसी अर्थ में सफल था या अंग्रेजों द्वारा इसे सिपाही विद्रोह कहना उचित? इन प्रश्नों के उत्तर तलाशते हुए यह किताब बनती चली गयी। बॉन्जुरी प्रोजेक्ट की एक और पेशकश आपके समक्ष।

199 pages, Kindle Edition

Published March 8, 2025

Loading...
Loading...

About the author

Praveen Jha

22 books1 follower

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
1 (25%)
4 stars
1 (25%)
3 stars
1 (25%)
2 stars
1 (25%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.