सुन्दर और सरल
ऐसा पहला उपन्यास जो भाषाई स्तर पर समझने और पढ़ने में पर्याप्त सरल था कि मुझे कुछ ही घण्टे लगे इसे पूरा करने में।
सरल किन्तु प्रभावी कि इसका रंगमंचीय प्रस्तुतिकरण किया जा सकता है।
यह सुखान्त प्रेम कथा है ।
बौद्ध धर्म के पतनशील रूप 'वज़्रयान' का विवरण मिलता है जो बताता है कि ईसा की बारहवीं शताब्दी में किस तरह के आडम्बर, पाखण्ड, अत्याचार, अनाचार और कुरीतियाँ व्याप्त हो गईं थीं बौद्ध धर्म में कि जिन दोषों के कारण इस शान्ति एवं सम्यकता की आधारशिला रखने वाली शाख को अपने ही मूल यानि कि भारत वर्ष से ही विलग होना पड़ गया था।
मठ और विहार की निरंकुशता, मनमानी और लिच्छवी राजसत्ता के राजकोष की प्राप्ति के लिए हुए संघर्ष के बीच एक मधुर प्रेम कहानी है, साथ ही देवदासी की मुक्तिसंघर्ष की गाथा भी है।
आचार्य चतुरसेन, पाठक के हृदय पर इस उपन्यास की सरल सुगम स्पष्ट भाषा एवम चित्रात्मक वर्णनात्मक शैली के द्वारा अपनी कथ्यात्मकता का पूर्ण सफल प्रभाव छोड़ते हैं।
एक बार पढ़ने योग्य है।
पुस्तक का सारांश लेखक द्वारा भूमिका में भर दिया गया है, जो तमाम ऐतिहासिक तथ्यों से भी अवगत कराता है।