हानि-लाभ के पलड़ों में
तुलता जीवन व्यापार हो गया
मोल लगा बिकनेवाले का
बिना बिका बेकार हो गया
Enjoyed reading these chosen poems full of positivity in these difficult times. More than the language, it's the thought process that impressed me very much.
Proud to have had a leader like him!
जो जितना ऊँचा, उतना ही एकाकी होता है
हर भार को स्वयं ही ढोता है
चेहरे पर मुस्कानें चिपका
मन ही मन रोता है
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना
गैरों को गले न लगा सकूँ
इतनी रुखाई कभी मत देना।
The poems are structured well with a miniature art dedicated to each.
Sample this 16 word profound poem:
वही मंज़िल
वही कमरा
वही खिड़की
वही पहरा
राज बदला
ताज बदला
पर नहीं
समाज बदला।
Sharing a couple of excerpts from my favorite poem from this collection:
जंग न होने देंगे
हथियारों के ढेरों पर जिनका है डेरा,
मुंह में शांति, बगल में बम, धोखे का फेरा,
कफ़न बेचनेवालों से कह दो चिल्लाकर,
दुनिया जान गई है उनका असली चेहरा,
कामयाब हो उनकी चालें, ढंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।
भारत-पाकिस्तान पड़ोसी, साथ-साथ रहना है,
प्यार करें या वार करें, दोनों को ही सहना है,
तीन बार लड़ चुके लड़ाई, कितना महंगा सौदा,
रूसी बम हो या अमरीकी, खून एक बहना है।
जो हम पर गुज़री बच्चों के संग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।