"बेबी और भालू" एक नन्हे बच्चे केशव और एक भूखे भालू की कहानी है, जो डर की जगह दोस्ती और आपसी समझ पर आधारित है। जब केशव रात में जंगल में जाता है, तो उसकी मुलाकात एक भालू से होती है जो बहुत भूखा है। लेकिन केशव डरने के बजाय उससे बात करता है और घर से उसके लिए खाना लाने का वादा करता है। इस छोटे से पल से दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन जाता है।
सुबह के नाश्ते की मेज़ पर, केशव अपनी माँ को इस रोमांचक मुलाकात के बारे में उत्साह से बताता है, और रात में, सोने से पहले, अपने पापा से फिर से वही कहानी सुनना चाहता है। यह कहानी सिर्फ दोस्ती और करुणा के बारे में नहीं है, बल्कि इस बात पर भी रोशनी डालती है कि अच्छी कहानियाँ कभी खत्म नहीं होतीं—वे बस नए सुनने वालों तक पहुँचती रहती हैं।