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Seepiyaan

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कबीर, तुलसी, वृंद, रहीम और बिहारी आदि कवियों ने सदियों पहले अपनी गहरी अन्तर्दृष्टि और मानव-स्वभाव की समझ की बुनियाद पर कुछ बातें कहीं, और इसके लिए उन्होंने कविता का जो रूप चुना, वह था—दोहा। दो पंक्तियों में गुँथी-गठी एक सम्पूर्ण कविता जो तीर की तरह जाकर हमारी चेतना में गड़ जाती है।

सैकड़ों सालों से ये दोहे हमारे साथ रहते आए हैं, कभी ये हमें हमारी ख़ामियाँ दिखाते हैं, कभी हमारे रहबर बन जाते हैं, और कभी कोई ऐसा सच बता जाते हैं जिसे हमारी दुनियावी निगाह देखकर भी नहीं देखती।

‘सीपियाँ’ में जावेद अख़्तर ने ऐसे ही कुछ दोहों को चुनकर उनके भीतर छिपे सत्य को आमफ़हम ज़बान में हर किसी के लिए सुलभ कर दिया है। जो बातें इनसे निकलकर आई हैं वे आज भी उतनी ही सच हैं, आज भी उतनी ही उपयोगी हैं, जितनी उस समय थ&

296 pages, Paperback

Published January 25, 2025

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Javed Akhtar

32 books124 followers

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Profile Image for Satwik.
74 reviews12 followers
March 10, 2026
हिंदी के दोहे बारहवीं कक्षा तक अध्यापकों के दबाव पढ़े थे तब समझ नहीं आया था कि दोहे क्यों बेमिसाल कहे जाते हैं। जावेद साहब की किताब सीपियाँ मुझे दोहों की दुनिया में फिर से ले गयी और इस बार हर दोहे को पढ़ के लगा हर सदी में कुछ लोग थे जो ग़लत के ख़िलाफ़ बोलना जानते थे।

कबीर, रहीम और वृन्द के चुनिंदा दोहों से भरी हुई ये किताब किसी समुन्दर से कम नहीं है। ये दोहे सदियों बाद भी आज के समाज के ऊपर उतने ही उपयुक्त हैं जितने उस समय रहे होंगे। ये दोहे जाति-धर्म से ऊपर उठकर सोचने, मानवता के लिए खड़े होने और प्रेम की भाषा बोलने के लिए बार-बार प्रेरित करते हैं।

साथ ही जावेद साहब ने दोहों के साथ उनका सरल अर्थ और संदर्भ भी रखा है, जिससे आज का पाठक उन्हें और गहराई से समझ पाता है।

जावेद साहब का बहुत धन्यवाद मुझे दोहों की दुनिया में दोबारा भ्रमण कराने के लिए।
Profile Image for Anshul.
108 reviews13 followers
March 19, 2026
"रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय॥"


- एक दोहा जिससे हम बेहद ही वाकिफ है
जावेद अख़्तर साहब traverse beyond a few couplets we have all grown with through our textbooks, through story telling and life experiences. In his book सीपियाँ he bridges a gap between language and understanding that traces the human nature, relationships, social norms connecting the origin to the present.

I thank my friend for this gift of knowledge and pages filled with life lessons that I will carry on my whole life.
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