क्या होता है जब एक 'अच्छी' औरत अपनी हदों को तोड़ने का फ़ैसला करती है?
बंद दरवाज़ों के पीछे, ख़ामोश रातों में, और समाज की नज़रों से दूर, हर औरत के अंदर एक कहानी छिपी होती है। एक ऐसी प्यास दबी होती है, जिसे बुझाने का ख़याल भी गुनाह माना जाता है। यह किताब चार अलग-अलग उम्र और हालातों में जी रही ऐसी ही औरतों की कहानी है, जो अपनी ख़्वाहिशों को आवाज़ देने के लिए दुनिया से लड़ जाती हैं।
यह चार बेबाक़ कहानियों का कलेक्शन है जो आपको किरदारों के मन की अँधेरी और कामुक गलियों में ले जाएगा।
इस किताब में पढ़िए:
मेरे अंदर: लखनऊ के एक संस्कारी घर की घुटन में, एक 'सुशील' बेटी की दबी हुई ख़्वाहिशें जब एक रहस्यमयी, उम्र में बड़े कलाकार के रंगों और बेबाक़ी से टकराती हैं, तो बग़ावत का कौन सा रंग पैदा होता है?
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