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""स्मृतियों की परछाइयाँ"" एक स्त्री की मौन प्रेम-यात्रा, जो अधूरी होकर भी पूरी है…

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“स्मृतियों की परछाइयाँ” एक आत्मा की आवाज़ है — न ज़ोर से चीखती, न चुप रहती। बस धीमे से, धीरे-धीरे दिल के किसी कोने में गूंजती रहती है। यह उन अनुभवों की दास्तान है जो इंसान को भीतर से बदल देते हैं। जो न पूरी तरह भुलाए जा सकते हैं, न पूरी तरह दोहराए जा सकते हैं। जो बस स्मृतियों की परछाइयों में रह जाते हैं।"सबसे गहरी कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं — और शायद वही उन्हें अमर बना देती हैं।"

कुछ लम्हे वक़्त के साथ बीत नहीं जाते — वे ठहर जाते हैं। किसी पुरानी खिड़की से आती धूप की तरह, किसी अधूरी चिट्ठी की आख़िरी पंक्ति की तरह, या फिर किसी रूह के भीतर गूंजते हुए उन शब्दों की तरह जो कभी कहे नहीं गए — पर हमेशा महसूस हुए। "स्मृतियों की परछाइयाँ" ऐसे ही पलों की एक भावनात्मक यात्रा है।

10 pages, Kindle Edition

Published June 25, 2025

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Ashok Bhatnagar

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