'अधूरी नहीं हूँ मैं' सिर्फ एक कविता संग्रह ही नहीं है, बल्कि हर स्त्री की आत्मा की आवाज़ है, जो समाज की परम्पराओं, रिश्तों, संघर्षों और अपेक्षाओं के बीच अपनी पहचान खोजती है। इस संग्रह में प्रेम , पीड़ा शक्ति और आत्म-स्वीकृर्ति को संवदेनशील और सशक्त शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। हर कविता एक दर्पण है जो न केवल पाठकों को नारी के भीतर झाँकने का अवसर प्रदान करती है , बल्कि उन्हें यह महसूस कराती है कि नारी कोई अधूरी कहानी nahin बल्कि एक संपूर्ण ग्रंथ है। यह पुस्तक उनके लिए है - 1. जो अपने अंदर की आवाज़ पहचानना चाहते है। 2. जो प्रेम के विविध रूपों को जानना चाहते है। 3. जो साहित्य को आत्मा का संगीत मानते है।