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द अब्बासीद: बगदाद पर चढ़ता चाँद

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यह सब शुरू हुआ था एक बियाबान में गूंजती फुसफुसाहट से। एक काली पताका जो रेत के टीलों पर लहराई। और उस पताका से… एक दुनिया हमेशा के लिए बदल गई।

गिरे हुए उमय्यदों की छाया में एक नई ताक़त उभरी—रहस्य से घिरी हुई, प्रतिशोध से भरी हुई, और महिमा के लिए नियत। वे खुद को अब्बासी कहते थे। और वे सिर्फ एक साम्राज्य नहीं, बल्कि एक ऐसी सभ्यता की नींव रखने वाले थे जो एक स्वप्न जैसी चमकती थी।

यह कहानी है उस खूनी क्रांति की, जिसने इस्लामी दुनिया का सबसे अद्भुत स्वर्ण युग जन्म दिया। एक ऐसा युग जहाँ खलीफा संगमरमर के महलों से राज करते थे, जहाँ विद्वान गुंबदों के नीचे बैठकर सितारों की भाषा पढ़ते थे, और जहाँ बगदाद की गलियाँ आकाश से भी ज़्यादा रोशन होती थीं।

डी. देवदत्त, इस्लामी इतिहासों के महागाथाकार, आप&#

85 pages, Kindle Edition

Published August 4, 2025

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D Devdatt

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