बड़े गर्व और ख़ुशी के साथ पेश है मेरे द्वारा लिखा गया गोल्डन जुबली, 50 वां उपन्यास “कानून का खिलाड़ी।”
जैसा कि उपन्यास के नाम से ही जाहिर है, ये उपन्यास भारतीय न्याय व्यवस्था और पुलिस पर आधारित है।
मेरा मानना है कि दुनिया का कोई भी सिस्टम अपने आप में संपूर्ण और कमियों से रहित नहीं है। लेकिन हर सिस्टम की बहुत सी खासियतें भी होती है।
हर सिस्टम में कहीं थोड़ा तो कहीं ज्यादा, कहीं निचले स्तर तो कहीं ऊपरी स्तर पर भष्टाचार मौजूद होता है। चालाक लोग, ऊंची पहुंच वाले अपराधी और उच्च पदों पर आसीन अधिकारी तथा राजनेता सिस्टम की इन कमियों का पूरा फायदा उठाते हैं और इसीलिए हर सिस्टम में कहीं ना कहीं बाहरी हस्तक्षेप भी होता है।
हमारे देश का पुलिस महकमा और न्याय का मंदिर कही जाने वाली अदालते