नैशनल और इन्टरनैशनल ड्रग लॉर्ड्स से जंग जीतकर विमल ने सोचा था कि आखिरकार अब उसे चैन और सुकून मिलेगा जिसकी की उसे बरसों से तलाश थी । लेकिन जब एक बार जब दुश्मन उसके सामने - जैसे कब्र फाड़ कर - उठ खड़े हुए तो उसे याद आया कि उसके वाहेगुरु ने उसके लिये कुछ और ही सोचकर रखा था । उसका वाहेगुरु उसे ‘खेत’ छोड़ने की इजाजत नहीं दे सकता था, और उसे तो बस ‘सूरा’ बनकर दीन के हित में लड़ते ही जाना था, लड़ते ही जाना था !
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
एक बेहद ही साधारण सी घटना से उपन्यास शुरू होता है परन्तु अंत तक बांधे रखता है जिसमे रामबाउ सिपाही का दुख, परनानी को उसके घर में जाकर फंसाना, माइकल हुआन का नाँव में संघर्ष, विनीता का अपने पति पर चिढ़ना बेहद आकर्षक घटनाये हैं.
नीलम तो विमल को बचाती रहती हैँ यहाँ भी कमाल करती है. इसी के साथ यहीं पर मेरी विमल सीरीज समाप्त होती है क्यूंकि इसके आगे के सभी भाग पहले ही पढ़े हुए हैं👌👌
मुझे 'जो लरे दीन के हेत' काफी रोमांचक उपन्यास लगा।उपन्यास ने अंत तक मुझे बांधे रखा और पढ़ने पर मजबूर करता रहा। उपन्यास के विषय में मेरे पूरे विचार इधर जाकर आप पढ़ सकते हैं : जो लरे दीन के हेत