हम कई बार सफर करते ही होंगे रोज! जीवन की नियम ही यह ह की सफर करना! क्यूंकि ये जीवन में कोई रुकावट नहीं होता है जीवन चलता रहता ह! और उसी के सात हम बे चलना ही पड़ेगा! ख़ास बात यह ह की वैसे सफर करते समय, हम कई नए नए चीजें, लोगों, और अनुभवों मिलते ही रहत। जिससे हम आगे वाले जिंदगी के सफर को हमसफर करे।
कभी न कभी इस जीवन की सफर में रेल गाडी की सफर भी लिप्त हो जाता है। तभी ओह सफर तब्दील होकर जीवन की हमसफर बन जाता है। और उस हमसफर एक पुस्तक बन गया तो बात ही क्या है जी।
वैसे ही मैं भी एक रेल यात्रा किया था "झांसी" से "लखनऊ" तक लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस से। इस सफर में मेरा हमसफर बना एक किताब और ओ है "मानसून एक्सप्रेस" जो हाल ही में मैंने एक गिवअवे में जीता। यह किताब मेरे लिए बहुत ही अमूल्य किताब है क्यूंकि यह किताब हिंदी के किताब ह और मैं 10 साल से अधिक समय हो गया है मैंने कोई हिंदी किताब नहीं पढ़ी है! और जब मैंने इसको पड़ने शुरू किया तो हिंदी और मेरे बीच में हुआ जो बड़ा शोक था ओ कम होने लगा और जब पुस्तक को पड़के खत्म किया मेरा और हिंदी भाषा की एक रिश्ता भी होगया! किताब के लेखक "श्री सतीश कुमार" जी ने बहुत ही सरलता के साथ आधुनिकता मिले हुए हिंदी को इस्तेमाल किया है, जो इस किताब को बहुत ही श्रेष्ट बनता है आज की Gen Z लोगों के लिए। किताब में 16 अध्याय है जो अलग-अलग जीवन की व्यक्तिगत कहानियों का प्रतिनिधित्व करता है!
कहाँ से शुरू करूँ दोस्तों, जब एक एक पैन में एक एक नए नए विशिष्टता से बरे हुए है। चलिए पहले अध्याय से करते है यह समीक्षा पे चर्चा! "ये हसी वादियां" जिसमे लेखक ने एक सपना से ही एक IT में काम करने जोड़े की जीवन कह दिया! मेरे लिए तो ये बहुमूल्य है उससे ज्यादा की एक मानसून की मौसम कैसे अपने फैसला में प्रभाव क्र देता है! कामकाजी में दफ्तर जाने लोग कैसे लोनावला पहुँच गया और उसके बाद कैसे उस फैसला में बदलाव आया ! कुछ ख़ास की बात है यार की अंत में इस कहानी में रखा हुआ मोड़!
अब मैं ऐसे एक एक अध्याय पे चर्चा करते चलूँ तोह ये ही एक पुस्तक हो जाएगा इसलिए मैं सबको जोड़के एक किस्से के रूप में बता देता हूँ सारे अध्याय को! कुछ रिश्ते ऐसे होते ह जो सोचे होंगे हम जीवन भर साथ में रहेंगे और खूब इस जीवन की सफर में आनंद लेंगे लेकिन "महज-ए-इस्तेफ़ाक़" कुछ अलग ही ह। हरीश के साथ सिर्फ उस रिश्ते के यादें और वॉलेट ही बचा था! कभी कभी साथ भी हो सकते जैसे रिटायरमेंट के बाद भी उस रिश्ते में मंद मंद मजा लेते ह कुछ इस दुनिया के श्रेष्ट लोग! वैसे ही "है अपना दिल तो आवारा" में श्री और श्रीमती श्रीवास्तव की कहानी भी! लेकिन जोड़ियों की कहानी में पैसे उतना नहीं होते, सिर्फ एक कमरा और किचन जिससे जीवन की खुशियाँ महसूस करते होंगे न! यह कहानी ह "कुछ कह, कुछ अनकही। जो ज्यादा कमाते ह ज्यादा खाते भी तो है इस आदुनिक दुनिया में लेकिन उससे कैसे एक आदुनिक कपल शुभांगी और आलोक के जीवन शैली में बदलाव करना पड रहा है, ये प्रस्तुत किया ह "चीनी कम है। लेकिन एक वैवाहिक जीवन में कुछ समय ऐसी भी होता है जब शान्ति पति और पति के बीच आजाता है जिससे रिश्ते दूर दूर हो जाता है! यह टूट भी सकते है जब इंसान दूसरे के व्यक्तिगत से नजर करने लगे तो! लेकिंग जब एक बार, एक ही बार अपने वालो और उनके त्याह को देखते ही जान चले जाएगा उस फैसला लेने ही वैसे कहानी ह "पति-पत्नी और startup। "हनीमून" के कहानी में एक कपल के गंगटोक यात्रा में क्या सीखा है और वहां के लोगों कैसे है, इसको अच्चे तरह से प्रकट किया है! मैंने कुछ पर्यटक जगह की टिपण्णी भी ले लिया!
जब जीवन में बच्चें आजाते तो क्या ही बोलना है, जीवन में बदलाव ही बदलाव ऐसे ही कहानियाँ है "पचास हज़ार" और "आम का बगीचा" जिसमे कैसे अपने बच्चों के लिए माँ और पापा अपने जीवन में बदलाव कर रहे है, औरे बच्चें कैसे और किस तरह से उससे प्रभाव हो रहे है को दिखाता ह! इस दुनिय में मित्रता बहुत आवश्यक ह। एक अच्छे मित्र मिलना बहुत ख़ास की बात है और ओह ही मित्र जब बचपन से सात होता है और काम के जगह बे साथ ही तोह बात ही क्या है जिसे पोहे-जलेबी में प्रस्तुत किया है लेखक ने। पर कुछ मित्रों जीवन बर नहीं रहते जैसे कहानियों के लिए अंत बहुत ही शीग्र आजाते है वैसे ही कुछ लोगों के जीवन भी। जब जो अनकही दुःख बरा होता है दिल में जिसको किसी से कह न सके और प्रस्तुत भी नही कर सकते "रीयूनियन" इसको अच्छे तरह से प्रस्तुत किया है! "पेस्ट्री" भी ऐसे कहानी में एक ही है।
इसमें बहुत छूने वाले कहानियाँ में एक कहानी मेरे लिए है "ग्रैंड ट्रंक EXPRESS" क्यूंकि मैं भी इस पुस्तक को एक एक्सप्रेस से सफर करते हुए ही पडा हूँ। जिसमे दिल्ली से लेके चेन्नई तक का एक यात्रा और उस यात्रा में क्या क्या हो रहा है! यह रचित के जीवन में क्या परिचय दिया है, कहानी ये ही है ! ऐसे ही "तमिलनाडु के केले" जिसमे योगेश जो हरयाणा से है लेकिन उनको कोयम्बटूर के एक कॉलेज में प्रवेश मिला है और कैसे अपने पढ़ाई एक अज्ञात भाषा बोलने वाले राज्य में करेंगे, और कैसे एक केला भी खाने के लिए खरीदने वाला है, यह प्रस्तुत किया ह ये कहानी!
ऐसे ही हर एक कहानी में लेखक ने जीवन के तातपर्य को एक अच्छे रूप से प्रस्तुत किया है। जिसे हर एक व्यक्ति के हृदय के जो कुछ प्रश्न या भ्रम खत्म ही हो जाते है! जैसे यह किताब मेरे सफर में हमसफ़र बना वैसे ही आपके जीवन के सफर में भी हमसफ़र जरूर बनेगा!
जरूर पदियेगा और जीवन में कुछ खुशियाँ महसूस करियेगा।