मुर्दहिया: दलित जीवन की अनसुनी सच्चाई! डॉ. तुलसीराम की आत्मकथा मुर्दहिया सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हाशिये पर जीने वाले समाज की सच्चाई की गूंज है। यह दलित जीवन की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद का ऐसा दस्तावेज़ है जो पढ़ने वालों को भीतर तक झकझोर देता है।
अगर आप साहित्य, समाज और असली भारत को समझना चाहते हैं, तो ‘मुर्दहिया’ ज़रूर पढ़ें। इसे पढ़कर आप समझेंगे कि संघर्ष ही असली ताकत है।