आदरणीय पाठकों, फिर से प्रस्तुत है आपका पोस्टमैन। पिछले भाग में मैने रिश्तों को जोड़ने का प्रयास किया और कुछ हद तक उसमें सफल भी रहा। पर अब मेरा अपना जीवन खाली खाली सा हो गया है। आखिर सेवा निवृत्ति के पश्चात एक सामान्य मनुष्य क्या करे?
इधर उधर बैठकर समय व्यर्थ करने से कुछ प्रोडक्टिव तो नहीं होगा। मैं तो यही मानता हूँ। देश के हर व्यक्ति को, प्रत्येक नागरिक को मृत्यु पर्यन्त कुछ ना कुछ प्रोडक्टिव कार्य करते रहना चाहिए। यह जीवन तो हमें कार्य करने के लिए ही मिला है ना कि सेवा निवृत्त होकर घर बैठने के लिए अथवा इधर उधर बैठकर गपशप करने के लिए। वैसे मैं भी इधर उधर बैठकर अपना समय व्यतीत कर सकता हूँ। पर मुझे लगता है कि जब तक जीवन है मैं देश की समस्याओं पर विचार कर सकता हूँ। उनके निदान के लिए के सुझ