सोचिए एक ऐसे पिंजरे के बारे में जो सोने का बना हो। जिसके अंदर दुनिया की हर सुख-सुविधा हो, लेकिन जुनून और सच्ची आज़ादी न हो। बयालीस साल की जान्हवी को बीस साल की कैद के बाद इसी पिंजरे से आज़ादी मिलती है। तलाक़ के कागज़ात पर दस्तख़त करते वक़्त उसका हाथ नहीं कांपता, क्योंकि बदले में उसे गोवा का एक आलीशान बीच हाउस और ज़िंदगी भर की आर्थिक सुरक्षा मिलती है। यह एक सौदा था जिसमें उसे अपनी आज़ादी की कीमत मिली थी।
लेकिन जब घर की ख़ामोशी शोर करने लगे और समंदर की लहरें तन्हाई का मज़ाक उड़ाने लगें, तो क्या वो सच में आज़ादी है? इस अकेलेपन से लड़ने के लिए एक नई जान्हवी जन्म लेती है - एक ऐसी औरत जो अपनी शर्तों पर जिएगी। वो अपने लंबे बालों को कटवाती है, अपने शरीर को तराशती है, और अपने अंदर की उस &#