सुनील दांडेकार द्वारा लिखी हुअी यह पुस्तक अपराध जगतमें घटनेवाली एक रोचक कहानी बताती है।
सुनील दांडेकर मराठीमें काफी अरसेसे लिखते आये है। हिंदीमें उनकी यह पहली पुस्तक हैं। मराठी साहित्य में अपराध, जासूसी और भयकथाके क्षेेत्र में सुनील दांडेकर ने अपनी एक अलग पहचान बनायी है।
कहानीमें कई जगह आनेवाले अनपेक्षित मोड वाचकको इस कहानी का अंत कैसे होगा इसका तर्क करते हुए एक अनोखे सफरपे ले जाती है।
यह पुस्तक पहले मराठीमें प्रकाशित हुअी थी। उस पुस्तक का सरल हिंदीमें यह अनुवाद है। उम्मीद है, आपको पसंद आएगी।