Jump to ratings and reviews
Rate this book

Tamasha

Rate this book
सूरज चारों तरफ बड़ी देर से तीखी और गर्म किरणों की बर्छियाँ और किरचें बरसा रहा है। छोटे लड़के के गले में पड़ी ढोल की रस्सी पसीने से भीग गयी है और उसके गले में, गर्दन में ख़ारिश कर रही है। उसके गाल पिचके हुए हैं और बारीक मशीन से कटे सिर के छोटे-छोटे बाल काँटों की तरह सीधे खड़े हैं। सूरज की निर्दय गर्मी ने उसे पीट डाला है, छील डाला है। पिछले कई मिनटों से उसने ढोल पर थाप नहीं दी है। बाप किसी जंगली सूअर की तरह गर्दन को थोड़ा-सा टेढ़ा करता है और तीखी आवाज़ में कहता है- "ढोल तेरा बाप बजायेगा क्या?"

बड़ी मशीनी हरकत से लड़का दोनों हाथों से ढोल को पीटना शुरू कर देता है। सेनापति सूरज इस छोटे-से नगाड़े की आवाज़ को सुनकर थोड़ा और ऊपर उठ जाता है। आक्रमण की मुद्रा में लड़के के बिल्कुल चेहरे के सामने तेज़, चमè

118 pages, Kindle Edition

Published September 8, 2025

About the author

Swadesh Deepak

36 books14 followers

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
0 (0%)
4 stars
0 (0%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
0 (0%)
1 star
0 (0%)
No one has reviewed this book yet.