यह कहानी है रोहन मेहरा की। एक ऐसा सीईओ जिसके लिए दुनिया सिर्फ़ एक बाज़ार है और लोग उसकी बैलेंस शीट के आँकड़े। वह हर चीज़ को खरीद सकता है, हर स्थिति को नियंत्रित कर सकता है। उसकी दुनिया में भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है, सिर्फ़ फ़ायदे और नुकसान के समीकरण हैं।
और फिर उसकी दुनिया में आती है कायरा। उसी की कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट की एक लड़की, जो रोहन की ही तरह आँकड़ों की भाषा समझती है। लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी आज़ादी, एक ऐसी आग है जिसे कोई स्प्रेडशीट माप नहीं सकती।
क्या होता है जब एक आदमी जो हर चीज़ पर नियंत्रण रखना चाहता है, एक ऐसी औरत से मिलता है जो उसकी हर गणना को गलत साबित कर देती है?
उनकी पहली मुलाक़ात एक पेशेवर सौदे की तरह शुरू होती है, लेकिन जल्द