ममता – एक आम औरत, जो हर सुबह घर के कामों और अपने छोटे बेटे की देखभाल में डूबी रहती है। पति सुरेंद्र का साथ उसे सुकून देता है, लेकिन कहीं गहराई में उसके मन में एक खालीपन है। गाँव की हवेली की यादें, छत की नीम की छाया और वहाँ की अधूरी कहानियाँ बार-बार उसके दिल में लौट आती हैं।
शहर की भागदौड़ में उसका जीवन चलता तो है, लेकिन हर दिन उसके भीतर की आग को और भड़काता है। कभी अकेलेपन में आईने के सामने खड़े होकर खुद से जूझती ममता, तो कभी नई ब्रा और पैंटी खरीदते वक़्त दुकान वाले की निगाहों में छुपे रहस्य को महसूस करती है। हर अनुभव उसे यह अहसास कराता है कि उसका शरीर और मन अब सिर्फ़ परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रह सकता।
इस बीच, पड़ोस की नंदिनी उसकी जिंदगी में एक नया अध्याय खोलती है। दो सहेलियों कí