वो पल, जब रिश्ते पवित्र नहीं रहते… और चाहतें देह की आग में जलकर पाप में बदल जाती हैं!
मंजिरी – एक शादीशुदा औरत, जो अपने पति की बाँहों में है, समीर – पति, जिसे अपनी साली की देह की प्यास है, रेखा – निडर, बिंदास और बेहिचक अपनी वासना ज़ाहिर करने वाली बहन, रोहित – पड़ोसी, जो पहली बार शादीशुदा औरत की पैंटी देखकर बेकाबू हो जाता है।
👉 छत पर बहका देने वाली चुसाइयाँ… 👉 तंबू में खामोशी के बीच सिसकारियाँ… 👉 जंगल में पीछे से ठोके जाते कड़क लंड की चोटें… 👉 और वो धार, जिसने सबकुछ गीला कर दिया…
यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि गर्म साँसों, पसीने, और गुप्त सुख का ऐसा सफ़र है जो आपकी रगों में आग भर देगा।
अगर आप चाहते हैं कि आपकी रातें करवटों में न कटें, बल्कि उबाल मारते रोमांच से भीग जाएँ, तो य