एक भावनात्मक और यथार्थवादी उपन्यास है, जो एक युवा व्यक्ति की कहानी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो पित्त की थैली में पथरी और लिवर की समस्याओं के कारण एक सरकारी अस्पताल में भर्ती होता है। यह कहानी न केवल उसकी शारीरिक तकलीफों को दर्शाती है, बल्कि अस्पताल के वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों की जिंदगियों, उनके दुख-दर्द, और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को भी उजागर करती है। नायक की यात्रा एक रात तेज पेट दर्द से शुरू होती है, जब उसे अपने चचेरे भाई गोरी और मम्मी के साथ राजस्थान के एक प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है। वहां उसे अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए लंबी लाइनों, टेस्टों की प्रक्रिया, और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। उसकी लिवर प्रोफाइल (SGOT और SGPT) बार-बार असामान्य आती है, जिससे उसका डर