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काशी वैद्यराज की कहानी: पारलौकिक कहानी (Supernatural Book 5)

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कहानी से:
काशी वैद्यराज अभी ज्यादा देर नहीं सोये होंगे कि देखा— घूँघट काढ़े हुए एक बहू तेज कदमों से मैदान से चलते हुए ड्यौढ़ी होते हुए जमीन्दार के घर में प्रवेश कर रही थी। काशी को बहुत आश्चर्य हुआ। इतनी रात गये बाहर के मैदान से आकर घर में किसने प्रवेश किया? जितना उन्होंने देखा, उतने से तो यही जान पड़ा कि वह किसी अच्छे परिवार की बहू थी।
खैर। वे आये थे वैद्यराजी करने, इधर-उधर की बातों से उन्हें क्या लेना-देना? जिसे जो अच्छा लगे, वह करे।
मैंने पूछा, “रात तब कितनी थी?”
“रात के एक बजे से कम नहीं होगा, ज्यादा ही होगा।”
“जिधर से आयी थी, उधर कोई बस्ती नहीं थी?”
“नहीं महाशय। खुला मैदान था बहुत दूर तक, उसके बाद कोदाले नदी थी। कोदाले नदी में गर्मियों में पानी नहीं रहता, पैदल पार किया जा सकता है। उस पार बल

9 pages, Kindle Edition

Published October 1, 2025

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