क्या होता है जब आपका आखिरी केस आपकी पूरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान बन जाए?
दिल्ली की बदनाम 'लाल गली' में एक बेरहम दलाल का कत्ल होता है। यह कोई आम हत्या नहीं। कातिल पीछे छोड़ जाता है सिर्फ एक सुराग—एक बाएं हाथ का रहस्य। यह केस इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के लिए सिर्फ एक और फाइल नहीं, बल्कि उनकी पैंतीस साल की सर्विस का आखिरी सलाम है। वह इसे जल्दी खत्म कर शांति से रिटायर होना चाहते हैं, लेकिन वह नहीं जानते कि यह केस उन्हें एक ऐसे दलदल में खींचने वाला है जहाँ सच और झूठ में कोई फ़र्क नहीं।
जांच विक्रम को एक ऐसी औरत, रोहिणी, तक ले जाती है जिसकी आँखें शांत हैं, पर अतीत में तूफ़ान दफ़न हैं। वह औरत जो एक पीड़िता लगती है, क्या वही असली शिकारी है? हर सच एक झूठ का नकाब पहने हुए है